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Delhi High Court Issues Contempt Notice to Husband for Alleged Violation of Marriage Agreement

दिल्ली हाईकोर्ट ने शादी से जुड़े एक मामले में पति के खिलाफ अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि यह मामला एक ऐसे समझौते के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसके आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द की गई थी। याचिकाकर्ता पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने शादी के बाद उसे नशीला पदार्थ खिलाकर रेप किया, जिसके चलते 2021 में FIR दर्ज हुई थी। बाद में दोनों पक्षों ने निकाहनामा किया और अप्रैल 2022 में एक समझौतानामा साइन किया, जिसके तहत पति को घर के सभी खर्च उठाने और पत्नी को हर महीने 25,000 रुपये भत्ता देने का वादा किया गया था। इसी समझौते के आधार पर कोर्ट ने आपराधिक मामला रद्द किया था।

अदालत के अनुसार, FIR रद्द होते ही पति ने कथित तौर पर सभी भुगतान बंद कर दिए और पत्नी को आर्थिक सहायता देना छोड़ दिया। पत्नी का आरोप है कि इसके बाद उसके साथ क्रूरता की गई और उसे छोड़ दिया गया। अदालत में सुलह कराने की कई कोशिशें भी की गईं, लेकिन मामला नहीं सुलझा। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने रजिस्टर्ड डाक और व्हाट्सऐप के जरिए तलाक के नोटिस भेजे और बाद में दूसरी महिला से शादी कर ली।

जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों से राहत मिलने के बाद प्रतिवादी ने समझौते की पूरी तरह अनदेखी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही कोई औपचारिक लिखित वादा अलग से न दिया गया हो, लेकिन यदि किसी पक्ष ने अदालत को किसी खास कार्रवाई के लिए इस भरोसे पर राजी किया हो कि वह अपने वादे निभाएगा, जबकि उसका ऐसा करने का इरादा ही न हो, तो वह अवमानना के दायरे में आ सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि पिछली कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा किए बिना दूसरी शादी कर लेना प्रतिवादी का बेहद निंदनीय आचरण है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए पति को निर्देश दिया है कि वह 1 मई से लागू 25,000 रुपये मासिक भत्ता पत्नी को देना शुरू करे। साथ ही उसे यह भी बताने को कहा गया है कि अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

Harish Yadav

Editor at PPC Herald, handles news and article writing and proofreading.

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