लापरवाही का खतरनाक नतीजा: बिना डॉक्टर बने इलाज करना पड़ा भारी, एक गलती में झुलस गई शरीर की 50% त्वचा

एक दिल्ली के बुजुर्ग को बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से ली गई दवा लेना भारी पड़ गया। बुखार होने पर उन्होंने बिना पर्ची के एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं ले लीं, जिसके बाद उन्हें टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलाइसिस (TEN) यानी स्टीवंस-जानसन सिंड्रोम जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया हो गई। इस गंभीर स्थिति में उनके शरीर की करीब आधी त्वचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और पूरे शरीर, हाथ-पैर, मुंह, गले तथा निजी अंगों की अंदरूनी सतहों पर बड़े-बड़े छाले बन गए, जिससे त्वचा गलकर उतरने लगी।
मरीज को द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां डॉक्टरों की विभिन्न टीमों ने 20 दिनों तक संयुक्त रूप से इलाज किया। संक्रमण का खतरा इतना अधिक था कि उन्हें जले हुए मरीज की तरह सख्त बैरियर नर्सिंग प्रोटोकाल में रखा गया। डॉक्टरों ने उनकी आंखों की रोशनी बचाने के लिए एडवांस अम्नियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्ट प्रक्रिया अपनाई। इलाज के दौरान मरीज की स्थिति और भी जटिल रही, क्योंकि उन्हें यूरिन इंफेक्शन और डायबिटीज भी थी।
डॉक्टरों के अनुसार, टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलाइसिस और स्टीवंस-जानसन सिंड्रोम दवाओं के रिएक्शन से होने वाली बेहद गंभीर और दुर्लभ स्थितियां हैं। इनका सबसे बड़ा कारण अक्सर एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर का गलत या अनियंत्रित इस्तेमाल होता है। इस बीमारी में त्वचा पर गंभीर छाले पड़ते हैं, त्वचा छिलने लगती है और समय पर इलाज न मिलने पर सेप्सिस, निमोनिया तथा मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रमजीत सिंह और डॉ. सरोज कुमार यादव ने बताया कि लोग अक्सर मेडिकल स्टोर से मिलने वाली दवाओं को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं, जबकि बिना चिकित्सकीय सलाह के ली गई एक सामान्य गोली भी जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि दवा लेने के बाद शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली, छाले या त्वचा में किसी भी तरह का असामान्य बदलाव दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत अस्पताल जाएं। डॉक्टरों ने कहा कि शुरुआती लक्षणों पर ही उपचार शुरू करने से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है।





